रंगदेवी

कुशल तार्किक, जो राधा जी से हँसी-ठिठोली करती हैं, धूप जलाती हैं और युगल को पंखा झलती हैं।

रंगदेवी सातवीं प्रमुख सखी हैं, जिनके बारे में कहा जाता है कि वे राधा जी से सात दिन छोटी थीं। उनका जन्म रखौली में माता करुणा देवी और पिता रंगसार के घर हुआ।[1]

उन्हें कुशल तार्किक बताया गया है, जो कृष्ण की उपस्थिति में राधा जी से हँसी-ठिठोली करती हैं। उनकी सेवाओं में सुगंधित धूप जलाना, सर्दियों में अंगीठी लाना और गर्मियों में युगल को पंखा झलना शामिल है।[1]

संदर्भ

  1. लेख: अष्टसखी (विकिपीडिया), Wikipedia contributors
  2. ग्रंथ: पद्म पुराण (गीता प्रेस), पृ. 570-572, Gita Press, Gorakhpur