राधा जी की आठ प्रमुख सखियों का परिचय: वे कौन हैं, उन्हें प्रायः किस क्रम में गिना जाता है, और आगे कहाँ पढ़ें।
अष्टसखी (संस्कृत: अष्टसखी, "आठ सखियाँ") आठ प्रमुख गोपियों का समूह हैं, जो ब्रज क्षेत्र में राधा-कृष्ण की घनिष्ठ सहचरी मानी जाती हैं।[1][4] पद्म पुराण के अनुसार वे राधा-कृष्ण की नित्य सहचरी हैं और उनके साथ गोलोक से पृथ्वी पर अवतरित हुईं।[2]
सबसे अधिक बताई जाने वाली सूची में ललिता, विशाखा, चंपकलता, चित्रा, तुंगविद्या, इंदुलेखा, रंगदेवी और सुदेवी के नाम हैं।[1] आठों में ललिता और विशाखा को सबसे प्रमुख माना जाता है।[3] परंपराओं और ग्रंथों के बीच सूची और क्रम भिन्न हो सकते हैं, इसलिए इसे प्रचलित सूची समझें, एकमात्र नहीं।
परंपरा में प्रत्येक सखी की अपनी सेवा मानी गई है, जो वे युगल को प्रेमपूर्वक अर्पित करती हैं।[1]
अनेक कृष्ण-परंपराएँ अष्टसखी का सम्मान करती हैं, जैसे वल्लभाचार्य का पुष्टिमार्ग, हरिदासी संप्रदाय, राधा वल्लभ संप्रदाय, गौड़ीय संप्रदाय और निम्बार्क संप्रदाय।[1] शाक्त परंपरा में उन्हें कभी-कभी आठ सिद्धियों (अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व) का रूप माना जाता है।[1]
परंपरा के अनुसार सखियों का जन्म बरसाना के आसपास के गाँवों में हुआ: ऊँचागाँव (ललिता), कामई (विशाखा), करहला (चंपकलता), चिकसौली (चित्रा), डभाला (तुंगविद्या), अंजनोक (इंदुलेखा) और रखौली (रंगदेवी और सुदेवी)।[1] इनमें से कई गाँवों में उन्हें समर्पित मंदिर हैं।[1]
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